हजरत अमीर हमजा जैसे निडर और बहादुर शख्स के इस्लाम अपना लेने की खबर जंगल की आग की तरह मक्के के एक - एक घर में पहुंच गई । कुण्फ़ारे मक्का के लिए यह बड़ा धमाका था । वे बहुत तिलमिलाये ,लेकिन हिम्मत न हुई कि हजरत हमजा को कुछ कह सकें या उन्हें सता सकें । उन के खिलाफ़ राजदारी से खुफ़िया मश्विरा करने लगे ।
हजरत अमीर हमज़ा के मुसलमान होने से आवारा लड़कों और गुंडों और बदमाशों के हौसले भी पस्त हो गये । सब ने यही समझ लिया कि अब अगर मुसलमानों को सताया गया , तो अमीर हमजा बदला लिए बिना न रहेंगे । इस लिए वे भी एहयियात करने लगे , लेकिन जब और जिस वक्त मौक़ा पाते , सताये बिना न रहते थे ।
अब फिर मुसलमान कुछ आजादी से बाजारों में आने - जाने लगे और खाने - पीने की फ़राखी हो गयी । लोगों से मिलने - जुलने लगे और तब्लीग का सिलसिला तेज हो गया ।
हर मुसलमान जिस से भी मिलता , इस्लामी तालीम उस के सामने पेश करता , कुरआन मजीद की आयतें सुनाता , लोगों पर उन का असर होता । कुछ मुसलमान हो जाते और अक्सर को मुसलमानों से हमदर्दी हो जाती इस तरह से इस्लाम धीरे - धीरे फैलने लगा ।
कुण्फ़ारे मक्का को इस से बड़ी चिन्ता हो गयी ।
उन्हों ने एक मज्लिसे शूरा बुलायी । फ़ौरन ही तमाम लोग जमा हो गये । इज्लास शुरू हुआ । इस बार अब सुफ़ियान को सदर बनाया गया ।
अबू जहल ने कहा , अरब भाइयो ! कितने अफ़सोस की बात है कि जितना मुसलमानों को दबाने की कोशिश की गयी , उतना ही वे उभरते चले गये । जो लोग हिजरत कर के हब्शा चले गये हैं , उन की ओर से डर है कि वे कहीं हब्शा के बादशाह को मक्के पर न चढ़ा लायें । मुसलमानो का हाल यह है की उन पर मुहम्मद का जो जादू एक बार चढ़ गया , तो अब उतरने का नाम नहीं लेता । न जाने मुहम्मद में कौन सा जादू है कि सब उस पर मोहित हो जाते हैं । मैं ने काहिनों से पूछा , आराफ़ से पूछा , तो वे भी इस के अलावा कुछ नहीं बताते । अबरश के पास में गया था , उस ने मुझे बताया कि अगर हम ने जल्दी न की और फ़ित्ने को दबा न दिया , तो सारा मक्का , बल्कि तमाम अरब , बल्कि दुनिया का बड़ा हिस्सा मुसलमान हो जाएगा । कितने जिल्लत और रुसवाई की बात है यह हमारे लिए ।
अबू जहल ने पूरे मज्मे पर निगाह डाली । हर तरफ़ से आवाजें आयों नहीं , हम ऐसा नहीं होने देंगे । हम इस जिल्लत को बर्दाश्त करने के लिए है जिंदा नहीं रहना चाहते ।
अबू जहल ने जोश में आ कर कहा , इस तरह से न कहो , बल्कि हम अपनी जिंदगी यह कहो कि हम अपनी जिंदगी में ऐसा वक्त न आने देंगे ।
फिर आवाज़ आयी , बेशक हम ऐसा वक्त न आने देंगे ।
अबू जहल ने कहा , जब यह बात है , तो तै कर लीजिए कि इस्लाम का खतरा किस तरह मिटाए , क्या उपाय करें , जिस से इस्लाम न फैलने पाये ।
अबू जहल बोला , लगता है कि हम इस बात से डर गये हैं कि अमीरे हमजा मुसलमान हो गये , और हम ने सख्तियो में कमी कर दी , मुसलमानों की हिम्मत बढ़ गयो । हमें चाहिए कि हम फिर पहले ही की तरह सख्तियो शुरू कर दें कि कोई मुसलमान घर से बाहर न निकलने पाये , न वे बाहर जायेंगे , न इलाम फैलेगा ।
वलीद ने कहा , इस सिलसिले में न हम को पहले कामियाबी हुई और न अब उम्मीद है । बेहतर है कि मुसलमानों का क़त्ले आम कर के उन का ई खात्मा ही कर दिया जाए ।
उतबा बोला , हमारा ऐसा करना , तमाम कबीलों से लड़ाई की दावत देना है , क्योंकि जो लोग मुसलमान हुए हैं , वे हर कबीले से ताल्लुक रखते ई है । यह नामुनासिब तजवीज़ है ।
अबू जहल बोला , मैं भी इसे पसन्द नहीं करता । बेचारे आम मुसलमानों का क्या कुसूर है ? उस पर तो जादु कर दिया गया है , क्यों न उस आदमी को क़त्ल कर डालो , जो सब से बड़ा जादूगर है और पूरे फ़ितनो का जड़ है ।
उमर ने कहा , यही बेहतर राय मालूम होती है ।
आस बिन वाइल सहमी बोला , इस बात को सोच लो कि मुहम्मद हाशिमी हैं । अगर इन के क़त्ल से बनू हाशिम खानदान उठ खड़ा हुआ , तो गया तो फिर वही शक्ल होगी कि तमाम अरब कबीलो में लड़ाई शुरू हो जाएगी ।
अबू लहब ने कहा , तुम इस से मुतमइन रहो । मैं भी हाशिमी हु, मैं अपने कबीले को काबू में रखेगा ।
वलीद ने संभल कर कहा , अगर यह बात है , तो अब कोई खतरा नहीं है । बस , अब मुहम्मद का खात्मा ही कर डालो ।
अबू जहल ने तमाम लोगों को ख़िताब करते हुए कहा , बोलो , कौन अपने माबूदों , अपने मजहब , अपनी कोम की हिमायत ने काम करने को तैयार है ।
अबू जहल की इस ललकार पर लोग खामोश हो गये ।
उमर को जोश आ गया और उन्होंने जोशीले अन्दाज़ में कहा , म फित्ने का खात्मा कर दूंगा । मेरी तलवार बगैर महम्मद ( सल्ल० ) को खत्म किये म्यान में न जाएगी ।
मज्मा उछल पड़ा । उमर की बहादुरी की तारीफ़ होने लगी ।
अबू जहल ने हिम्मत बढ़ाते हुए कहा , ऐ ख़त्ताब के बेटे उमर ! मुहम्मद को जब क़त्ल कर के आओगे , तो मैं तुम को सौ सुर्ख ऊट इनाम में दूंगा ।
उमर बोले , मैं किसी लालच में नहीं , बल्कि क़ौम की भलाई में यह काम करूगा ।
अबू जहल तुरन्त बोला , यह तो सभी जानते हैं , मैं तो सिर्फ इनाम की बात कर रहा हूं ।
उमर ने कहा , तो खुशी से तुम्हारा इनाम कुबल करूगा ।
इस के बाद उमर उठे और हुज़ूर सल्ल० के मकान की तरफ़ चल दिए ।
तमाम मज्मा उन की कामियाब वापसी का इन्तिजार करने लगा ।
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